ग्रामीण आजीविका परियोजना : आदिवासियों का जीवन-स्तर बदला

| February 14, 2012 | 0 Comments

tribals भोपाल (डेली हिंदी न्‍यूज़)। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल नौ जिलों में गरीब परिवारों को आजीविका के बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने और उनके आर्थिक उत्थान में मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका परियोजना के माध्यम से महती सफलताएँ हासिल हुई हैं। यह परियोजना प्रदेश के धार, झाबुआ, बड़वानी, अलीराजपुर, श्योपुर, मंडला, डिंडोरी, शहडोल और अनूपपुर जिले के 2,901 गाँवों में संचालित है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग (डीएफआईडी) के वित्तीय सहयोग से क्रियान्वित किया जा रहा है। परियोजना के जरिये इन जिलों के ग्रामीण अंचलों में निर्धनतम आदिवासी परिवारों की आर्थिक समृद्धि के लिये प्रतिबद्धता से कार्य किये गये हैं।

प्रदेश में इस परियोजना का क्रियान्वयन दो चरणों में किया गया है। एक जुलाई, 2004 से परियोजना का प्रथम चरण शुरू हुआ था। इस दौरान 30 जून, 2007 तक 815 ग्रामों में 1 अरब 14 करोड़ 6 लाख रुपये की लागत से परियोजना का क्रियान्वयन किया गया है। परियोजना का दूसरा चरण एक जुलाई, 2007 से शुरू हुआ, जो जून, 2012 तक जारी रहेगा।

दूसरे चरण में अब तक प्रथम चरण में शामिल 815 गाँवों को शामिल करते हुए कुल 2,901 गाँवों में परियोजना गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। परियोजना में शामिल गाँवों में रहने वाले परिवारों की संख्या करीब 4 लाख 85 हजार है। इनमें से लक्षित 2 लाख 85 हजार निर्धनतम आदिवासी परिवारों के जीवन-स्तर में बदलाव और उनके आर्थिक उत्थान के लिये आजीविका की प्रभावी नीतियों पर अमल किया गया है।

संबंधित गाँव में कृषि और पशुपालन के साथ-साथ लघु उद्यमों से परिवारों और समुदाय को जोड़ा गया है। इस मक़सद से स्व-सहायता समूह का गठन कर उनके सामूहिक उत्थान के प्रयास जारी हैं। परियोजना में स्थानीय संसाधनों और अवसरों की उपलब्धता के आधार पर ऐसी द्वि-स्तरीय रणनीतियाँ अपनाई जा रही हैं, जिससे उनके जीवन-स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है।

गाँवों में लघु उद्यमों को बढ़ावा देकर गरीब परिवारों को रोजगार और आमदनी के बेहतर अवसर सुलभ कराने में परियोजना के जरिये कामयाबी हासिल हुई है। ग्राम-सभाएँ इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आजीविका संबंधी विभिन्न गतिविधियों का अनुमोदन ग्राम-सभा द्वारा ही किया जाता है। इस तरह परियोजना मार्गदर्शक संस्था की भूमिका निभाते हुए ग्राम-सभा को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी का भी निर्वाह कर रही है।

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