प्रदेश में 15 मार्च से शुरू होगी समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी
भोपाल (डेली हिंदी न्यूज़)। प्रदेश में 15 मार्च से शुरू होने जा रही गेहूँ की समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर भंडारण व्यवस्थाएँ भी तेज हो गई हैं। राज्य सरकार संयुक्त उपक्रम के तहत उदार और लाभप्रद प्रावधान कर चुकी है। इस संबंध में 13 फरवरी को नोटिस इनवाइटिंग टेंडर (एनआईटी) जारी कर दिए गए। खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारस चन्द्र जैन ने निजी गोदाम मालिकों से इस योजना का लाभ उठाने की अपील की है।
राज्य सरकार उपार्जित खाद्यान्न की सुरक्षा को लेकर चारदीवारी वाले कवर्ड गोदामों को प्राथमिकता दे रही है। इस मकसद से निजी क्षेत्र से ऐसे करीब 51 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम लिये जाने हैं। मुख्यमंत्री और खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री ने पिछले महीनों में अलग-अलग बैठकों में निजी गोदाम मालिकों से चर्चा कर संयुक्त उपक्रम वाली योजनाओं में उनकी सहमति के बाद उदार प्रावधान करवाये। इसमें खास तौर पर न्यूनतम साढ़े तीन महीनों के किराये की गारंटी सरकार दे रही है। यह अवधि गोदाम लेने के पहले दिन से लागू हो जायेगी, भले ही फिर गोदाम पहले ही खाली करवा लिया जाए।
राज्य सरकार ने संयुक्त उपक्रम के तहत तीन योजनाएँ शुरू की हैं। इनमें 50-50 प्रतिशत भागीदारी में तय अवधि के लिये 50 प्रतिशत किराया गोदाम संचालक को भण्डार गृह निगम देगी और अपनी 50 प्रतिशत भागीदारी के तहत गोदाम के संचालन और रखरखाव के खर्चे खुद उठायेगी। इसी तरह 65-35 भागीदारी में किराये की 65 प्रतिशत अदायगी और 35 प्रतिशत सुरक्षा, मजूरी आदि के खर्चे शामिल रहेंगे। संयुक्त उपक्रम की तीसरी योजना 70-30 प्रतिशत भागीदारी की होगी और इसमें निजी गोदाम मालिक और निगम के बीच किराया, श्रम, अधोसंरचना आदि के काम शामिल रहेंगे।
निजी क्षेत्र से गोदाम लिये जाने में एक अन्य योजना 80-20 प्रतिशत के अनुपात की भागीदारी पर आधारित रहेगी। इसमें 80 प्रतिशत किराये के भुगतान के बाद गोदाम मालिक को ही बीमा, हानि-लाभ, कीटोपचार आदि के खर्च उठाने होंगे। शेष 20 प्रतिशत भागीदारी में भंडार गृह निगम अन्य रखरखाव के खर्चे उठाएगी। भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिये राज्य सरकार ने एक और उदार प्रावधान यह किया है कि आंशिक खाली गोदाम भी किराये पर लिए जाएंगे। यानी, उनके कुछ हिस्से में अन्य खाद्यान्न या सामग्री रखी है तो भी दूसरा खाली हिस्सा ले लिया जायेगा।
निजी क्षेत्र से किराये पर उपरोक्त योजनाओं के तहत लिये जाने वाले गोदामों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जा रही है। इसके लिये इन गोदामों का वेयर हाउसिंग एण्ड रेग्यूलेटरी अथारिटी (वाड्रा) में पंजीकृत होना जरूरी होगा। एक और उदार प्रबंध यह किया जा रहा है कि संयुक्त उपक्रम वाली तीन योजनाओं में लायसेंस की अनिवार्यता को शिथिल किया गया है। इससे गोदाम लेने के पहले लायसेंस की जरूरी औपचारिकताएँ पूरी नहीं होने पर भी गोदाम ले लिये जायेंगे। यह औपचारिकताएँ बाद में पूरी की जा सकेंगी।
राज्य सरकार के पास अपने 12 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता के गोदाम उपलब्ध हैं। संयुक्त भागीदारी के तहत निजी क्षेत्र से 51 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम लिये जाने हैं। इसमें कमी होने की सूरत में एक अन्य विकल्प कच्चे और पक्के कैप-गोदाम बनाने का रखा गया है। ऐसी जरूरत पड़ने पर मंडी बोर्ड और विपणन संघ को साढ़े छह-छह लाख मीट्रिक टन और भंडार गृह निगम को 10 लाख मीट्रिक टन के ऐसे कैप-गोदाम निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।
खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री श्री पारस चन्द्र जैन ने निजी गोदाम संचालकों से अपील की है कि वे 3 मार्च तक भंडार गृह निगम से अनुबंध कर लें। इसके लिये रखे गये प्रावधानों का लाभ ‘पहले आओ पहले पाओ’ के सिद्धांत पर जल्द उठाया जा सकेगा।
Category: News


