प्रदेश सरकार ने लिए छोटे उद्योगों के हक में बड़े फैसले
भोपाल (डेली हिंदी न्यूज़)। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों का राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में आयोजित किया गया। उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने सम्मेलन में सिर्फ 15 मिनट में लघु उद्यमियों के हक में अहम घोषणाएँ कीं। यह राष्ट्रीय सम्मेलन मध्यप्रदेश लघु उद्योग संघ, लघु उद्योग निगम और उद्योग विभाग ने मिलकर आयोजित किया है। इसमें विभिन्न सत्रों में विषय-विशेषज्ञों के वैचारिक विमर्श के साथ ही सुझाव और सिफारिशें भी व्यक्त होंगे।
उन्होंने कहा कि नई तकनीकी सीखने विदेश जाने वाले छोटे उद्यमियों के किराये का खर्च भी राज्य सरकार उठायेगी। यह कार्य ट्रायफेक के माध्यम से करवाया जायेगा। श्री विजयवर्गीय ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास को लेकर मौजूदा दौर की जरूरत के मुताबिक ग्लोबल-विलेज के काँसेप्ट पर काम कर रही है। इसके तहत छोटे उद्योगों को तकनीकी तरक्की की रफ्तार में शरीक करवाने के लिये उन्हें सक्षम बनाने के साथ ही उनकी दृष्टि और सोच को भी बढ़ाया जायेगा। इस काम को अंजाम देने के लिये सरकार और विभागीय अमला पूरी शिद्दत से सक्रिय हैं।
छोटे उद्योगों की रोजगार देने में भूमिका अहम
उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि रोजगार पैदा करने में छोटे उद्योगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, पर इसके लिये चुनौतियाँ भी कम नहीं। इसी मक़सद से राज्य सरकार छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा देने के साथ ही उनका संरक्षण करने के लिये बाजार भी उपलब्ध करवाना चाहती है। उन्होंने इस दिशा में ज्ञान और अनुभवों को बाँटने की जरूरत बताई तथा इस उद्देश्य से लघु उद्योग संघ द्वारा बुलवाए गए सम्मेलन को सार्थक बताया।
उद्योग मंत्री श्री विजयवर्गीय का मानना था कि देश में प्रचुर और दक्ष मानव-संसाधन उपलब्ध हैं, जरूरत सिर्फ उन्हें मौके उपलब्ध करवा कर विदेशों में जाकर काम की तलाश करने से रोकने की है। मुख्यमंत्री श्री चौहान और पूरी सरकार अत्यंत उदारता के साथ उद्योगों के संवर्द्धन के लिये तत्पर हैं। उनका आश्वासन था कि हम उद्योगों के साथ चलकर तरक्की का रास्ता तय करने के पक्षधर हैं।
कुदरती संसाधनों का हो भरपूर इस्तेमाल
इस मौके पर क्षेत्रीय सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी ने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और प्र-संस्करण तकनीकों का भरपूर इस्तेमाल उद्योगों के विकास में नई जान फूँक सकता है। इस तथ्य के केन्द्र में विकास की संभावनाएँ तलाशी जानी चाहिए। उन्होंने यह सलाह भी दी कि छोटे उद्योगों के कई उत्पादों को आसान बाजार उपलब्ध करवाया जाना चाहिये। इसी तरह सिंचाई, कृषि और वन जैसे विभागों से तालमेल बैठाकर इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिये। श्री जोशी का कहना था कि बड़े उद्योगों के साथ उनके सहायक उद्योगों को भी कायम करने पर ध्यान देना जरूरी है ताकि औद्योगीकरण का वास्तविक लाभ सुनिश्चित हो सके।
पूरे प्रदेश में होंगी कार्यशालाएँ
राज्य लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष श्री अखण्ड प्रताप सिंह ने सम्मेलन में कहा कि ज्ञान और अनुभवों को साझा करवाने के लिये निगम पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालयों पर कार्यशालाएँ आयोजित करेगा। पिछले महीनों सतना से शुरू किये जा चुके इस सिलसिले का अगला पड़ाव मार्च में नीमच होगा। इन मौकों पर उद्यमियों के साथ ही इंजीनियरिंग और प्रबंधन के छात्रों को भी जोड़ा जा रहा है।
स्मारिका का विमोचन
उद्योग मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने सम्मेलन में लघु उद्योग संघ की एक स्मारिका और उद्यमियों को दिये जाने वाले सर्टिफिकेट का विमोचन किया। उन्होंने इस सर्टिफिकेट की पहली प्रति लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष और उद्योगपति डॉ. आर.एस. गोस्वामी को प्रदान की। श्री विजयवर्गीय ने यह आश्वासन भी दिया कि सम्मेलन में उपजने वाली सिफारिशों को अपनी नीति का हिस्सा बनाने में सरकार नजरअंदाज़ नहीं करेगी।
इस मौके पर लघु उद्योग संघ के श्री विपिन जैन और श्री अरुण जैन के अलावा उद्योग आयुक्त श्री आर.के. चतुर्वेदी और श्री ए. कार्तिकेयन समेत प्रदेश और देश के 150 से ज्यादा लघु उद्यमी मौजूद थे।
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